सुचना और संचार की दुनिया आज एक और क्रांति की देहलीज पर खड़ी है । पिछले दिनों ग्रेफिन नामक एक पदार्थ की खोज हुई जिससे इलेक्ट्रोनिक जगत मे एक युगान्तरी बदलाव आने वाला है । ८ अक्टूबर २०१० मे इसकी खोज के लिए दो वैज्ञनिको को नोबेल पुरुस्कार दिया गया
नोबेल समिति ने ब्रिटेन के मानचेस्टर विश्व विद्यालय के आंद्रे जीम तथा कांस्तेंतीं नोवोसेलोव को ग्रेफिन की खोज के लिए २०१० का भौतिक विज्ञानं का नोबेल पुरुस्कार देने की घोषणा की। ये आपस मे गुरु शिष्य है इनका जन्म रूस मे हुआ है दोनों ने नीदरलैंड मे काम किया है जहा नोवोसेलोव ने अपना शोध पूरा किया । नोवोसेलोव १९७३ के बाद सबसे युवा विज्ञानी है ।
ग्रेफिन कार्बोन रूपी तत्व का एक रूप है ।यह कार्बोन परमाणु से बनी एक समतल तथा सपाट परत है यह स्टील से २०० गुना मज़बूत हीरे से कही आधिक कठोर और ताबे से बेहतर विधुत सुचालक है ।ग्रेफिन का नाम graphite से निकला गया है ग्रेफिन इकहरे परमाणु की मोटाई वाली समतल परत है या हम कह सकते है की अनेक ग्रेफिन परतो के एक के एक ऊपर तह किये जाने से ग्राफिते बनता है ।ग्रेफिन एक सेमिमेटल तथा आर्धचालक है ।ग्रेफिन के एलेक्ट्रोन सिलिकॉन की तुलना मे अधिक रफ़्तार से गतिमान होते है ।इससे भविष्य मे बनने वाले कंप्यूटर कई गुना स्पीड वाले होंगे यह अधिक तापमान पर भी काम करते रह सकेंगे इसकी संचरना दियामी है इसलिए सिलिकॉन की तुलना मे इससे कही ज्यादा सूक्ष्म चिप बनाना संभव हो सकेगा ।
उपग्रहों हवाई जहाज तथा कारों मे कोमपोसित मटेरिअल के तौर पर ग्रेफिन का उपयोग हो सकेगा
ग्रेफिन आधारित रासायनिक सेंसरो का प्रयोग एअरपोर्ट तथा रेल जसे जगहों पर सामानों मे छिपाकर रखे गए विस्फोटको का पता लगाने मे बखूबी किया जा सकता है
ग्रेफिन दुनिया का सबसे मजबूत पदार्थ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की महज एक सल्लोफिं पेपर के टुकड़े जितनी मोती ग्रेफिन की चादर से डेढ़ टन वजनी कार उठाई जा सकती है इससे हवाई जहाज से लेकर खेलकूद तक के सामान बनाये जा सकते है इसके प्रयोग से ईधन की बचत की जा सकती है तथा ग्रीन हाउस प्रभाव के रोकथाम मे सहायता मिलेगी ।
तेक्सोस विश्व विद्यालय की ग्रेफिन एनेर्जी ग्रेफिन से बनी ultra capacitor का प्रयोग विधुत उर्जा मे कर रही है
नोबेल समिति ने ब्रिटेन के मानचेस्टर विश्व विद्यालय के आंद्रे जीम तथा कांस्तेंतीं नोवोसेलोव को ग्रेफिन की खोज के लिए २०१० का भौतिक विज्ञानं का नोबेल पुरुस्कार देने की घोषणा की। ये आपस मे गुरु शिष्य है इनका जन्म रूस मे हुआ है दोनों ने नीदरलैंड मे काम किया है जहा नोवोसेलोव ने अपना शोध पूरा किया । नोवोसेलोव १९७३ के बाद सबसे युवा विज्ञानी है ।
ग्रेफिन कार्बोन रूपी तत्व का एक रूप है ।यह कार्बोन परमाणु से बनी एक समतल तथा सपाट परत है यह स्टील से २०० गुना मज़बूत हीरे से कही आधिक कठोर और ताबे से बेहतर विधुत सुचालक है ।ग्रेफिन का नाम graphite से निकला गया है ग्रेफिन इकहरे परमाणु की मोटाई वाली समतल परत है या हम कह सकते है की अनेक ग्रेफिन परतो के एक के एक ऊपर तह किये जाने से ग्राफिते बनता है ।ग्रेफिन एक सेमिमेटल तथा आर्धचालक है ।ग्रेफिन के एलेक्ट्रोन सिलिकॉन की तुलना मे अधिक रफ़्तार से गतिमान होते है ।इससे भविष्य मे बनने वाले कंप्यूटर कई गुना स्पीड वाले होंगे यह अधिक तापमान पर भी काम करते रह सकेंगे इसकी संचरना दियामी है इसलिए सिलिकॉन की तुलना मे इससे कही ज्यादा सूक्ष्म चिप बनाना संभव हो सकेगा ।
उपग्रहों हवाई जहाज तथा कारों मे कोमपोसित मटेरिअल के तौर पर ग्रेफिन का उपयोग हो सकेगा
ग्रेफिन आधारित रासायनिक सेंसरो का प्रयोग एअरपोर्ट तथा रेल जसे जगहों पर सामानों मे छिपाकर रखे गए विस्फोटको का पता लगाने मे बखूबी किया जा सकता है
ग्रेफिन दुनिया का सबसे मजबूत पदार्थ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की महज एक सल्लोफिं पेपर के टुकड़े जितनी मोती ग्रेफिन की चादर से डेढ़ टन वजनी कार उठाई जा सकती है इससे हवाई जहाज से लेकर खेलकूद तक के सामान बनाये जा सकते है इसके प्रयोग से ईधन की बचत की जा सकती है तथा ग्रीन हाउस प्रभाव के रोकथाम मे सहायता मिलेगी ।
तेक्सोस विश्व विद्यालय की ग्रेफिन एनेर्जी ग्रेफिन से बनी ultra capacitor का प्रयोग विधुत उर्जा मे कर रही है
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